श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में जमकर झूमे श्रध्दालु
चिड़ावा, भगवान राम का जीवन मर्यादा पुरूषोत्तम का जीवन है जिसमें उन्होने समस्त रिश्तो को जीने का समुचित तात्पर्य बताया है। उन्होने अपने जीवन के माध्यम से स्पष्ट किया है कि एक पुत्र का पिता के प्रति क्या कर्तव्य है। एक भाई का भाई के प्रति, एक सेव का अपने स्वामी के प्रति, एक मित्र का अपने मित्र के प्रति क्या कर्तव्य है इन सब को उन्होने भगवान राम के जीवन के माध्यम से वर्णन किया। उक्त कथन कथा व्यास यशोधावतार श्रीजी बाबा ने कस्बें के चौरासियां मंदिर में अरूण कुमार भगेरिया परिवार के द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कहे। उन्होने कहा कि भगवान राम के जीवन को प्रत्येक मनुष्य को यो का त्यो स्मरण करना चाहिऐ। उन्होने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाऐं आध्यात्मिक लीलाऐं है कृष्ण की लीलाऐं प्रत्येक व्यक्ति के ह्दय में चलती है जिसमें कंश अभिमान का स्वरूप है। भागवत में जिन्हे कृष्ण का अनुचर बताया गया है वो पूतना, अघासुर, बकासुर आदि है जो काम, क्रोध, मद,लोभ, मान मत्सर आदि है। उन्होने बताया कि मनुष्य का अभिमान गलित होकर समाप्त हो जाता है तब ह्दय पटल पर भगवान श्रीकृष्ण का उदय होता है। कथा से पूर्व भगेरिया परिवार के द्वारा भागवत तथा व्यास पूजन किया गया।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में जमकर झूमे श्रध्दालु:-भागवत कथा के चौथे दिन कथा स्थल पर आयोजित हुए कृष्ण जन्मोत्सव में श्रध्दालु जमकर झूमे, कथा के दौरान नंदबाबा बने अनूप भगेरिया तथा उनकी पत्नि ने श्रध्दालुओं में बधाईयां बांटी। वासुदेव बने हर्षित भीमराजका जब भगवान कृष्ण को लेने को टोकरी में बिठा कर लेकर आये तो भगवान के चरण छुने की होड़ सी लग गयी। कथा के दौरान सजी भगवान श्रीकृष्ण की झांकी ने सभी को खुब आनंदित किया। श्रीजी बाबा ने बधाई गीत गाकर माहोल को आनंदमय बना दिया। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रध्दालु महिला-पुरूष उपस्थित थे।
